अम्बेडकरनगर। आजादी के जश्न में पूरा देश मनाएगा आजादी का 75 वाँ शाल जानिए क्या है खास।

अम्बेडकरनगर। आपको बता दें कि स्वतंत्रता दिवस या आजादी का पर आते ही हमारे दिमाग में मन में एक ऐसी उत्साह आ जाता है कि लगता है है मानो यह धरती अपनी रंग बिरंगी आंचल से ढक लिया ही इतना ही नहीं, ये शब्द सुनने में जितना अच्छा लगता है उससे कहीं ज्यादा इस शब्द के साथ जीने में मजा है। स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ को लेकर लोगों में उल्लास है। इसे लेकर शनिवार को ही विभिन्न सरकारी कार्यालयों को जहां सजाया गया, वहीं बाजारों में चहुंओर तिरंगा व अन्य सामग्रियों से सजी दुकानों पर लोगोें की भीड़ जुटी रही। बच्चों व युवाओं ने बड़ी संख्या में बाजारों में पहुंचकर तिरंगा व अन्य सामानों की खरीदारी की। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पुलिस लाइन परिसर में भी तैयारियां की गई हैं। रविवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर न सिर्फ यहां भव्य परेड होगी, बल्कि छात्र-छात्राएं विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत करेंगे। विभिन्न सरकारी कार्यालयों में जहां ध्वजारोहण व गोष्ठी का आयोजन होगा, वहीं सुबह क्षेत्रीय श्रीगांधी आश्रम से प्रभातफेरी निकाली जाएगी।

स्वतंत्रता दिवस का उल्लास आम नागरिकों व बाजारों में देखने को मिला। जिला मुख्यालय पर 50 से अधिक दुकानें तिरंगा, हैट, टी-शर्ट आदि विशेष सामानों से सजी दिखीं। सामानों की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में आम नागरिक भी पहुंचे। सरकार की ओर से शनिवार को आंशिक कर्फ्यू खत्म कर दिए जाने के चलते दुकानदारों में भी उत्साह दिखा। बाजरों में सामानों की खरीदारी के लिए नागरिकों की भीड़ दिखी। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में कोरोना गाइडलाइन का पालन कराने के लिए डीएम ने विशेष निर्देश जारी किया है। कहा कि कार्यक्रमों में गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

सुरक्षा को लेकर पुलिस सक्रिय

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक तरफ जहां आम नागरिक तैयारियां में जुटे नजर आए, वहीं पुलिस टीम भी पूरी तरह चौकस दिखी। क्षेत्र भ्रमण के साथ ही जगह-जगह सघन चेकिंग अभियान भी चलाया गया। प्रमुख बाजारों, चौराहों आदि पर पुलिस की संख्या भी बढ़ी दिखी। एएसपी संजय कुमार राय ने बताया कि सभी सीओ व थानाध्यक्षों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई सुरक्षा व्यवस्था में खलल डालने की कोशिश करेगा तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह चौकस है। एक समय था जब अंग्रेजों ने पूरे देश को गुलाम बना रखा था। इतना ही नहीं वे अपने हिसाब से काम भी करवाते, किसी भारतीय को अपनी बात रखने का अधिकार नहीं था और पूरा देश गुलामी की जंजीरो में जकड़ा हुआ था। जहां एक तरफ लंबे वक्त तक देश के लोगों ने अंग्रेजी शासन के लिए गुलाम बनकर काम करते रहे, वही देश के कई वीर सपूत देश को आजादी दिलवाने के तरीकों पर काम कर रहे थे। इन लोगों ने अंग्रेजों से टक्कर ली और भारत को आजादी दिलवाकर ही दम लिया। इसमें कई वीर सपूतों को अपना बलिदान तक देना पड़ा और तब कहीं जाकर 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। इस साल हम इस आजादी का 75 वां साल मना रहे हैं। ऐसे में इस दिन लाल किले से लेकर देश की अलग-अलग जगहों पर तिरंगा फहराया जाता है। और लोग एक-दूसरे को इस दिन की शुभकामनाएं देते हैं। तो चलिए इस बार आपको शुभकामनाएं देने के लिए कुछ खास संदेशों के बारे में बताते हैं।

आपको बताते हैं कुछ पुरानी यादें।

 कल यानी 15 अगस्त को देश भर में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। 15 अगस्त के दिन पूरा भारत और विदेशों में रहने वाले भारतीय इसे बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाते हैं। हर भारतीय के लिए यह दिन काफी गर्व का दिन होता है। 15 अगस्त के ही दिन वर्ष 1947 में भारत को अंग्रेज़ों की गुलामी से आज़ादी मिली थी। इसी दिन भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र बना था। उस दिन से लेकर आज तक हर साल स्वतंत्रता दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से राष्ट्र ध्वज फहराते हैं। भारत इस साल अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है।यूं तो इस मौके पर देशभर में तमाम तरह के कार्यक्रम और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप की वजह से कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। स्वतंत्रता दिवस ऐसा मौका है, जो हमें उन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाता है। जिन्होंने अंग्रेज़ों से लोहा लिया था। उनके खिलाफ डटकर खड़े रहे, आज उन्हीं की कुर्बानियों की वजह से हम खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं।

आइए हम जाने क्या करते हैं इस दिन

15 अगस्त के दिन मुख्य कार्यकम लाल किले पर किया जाता है। प्रधानमंत्री ध्वजरोहण के साथ देश को संबोधित करते हैं। स्वतंत्रता दिवस के दिन लोग पतंगबाज़ी का आनंद उठाते हैं। लोग कई ध्वज के रंगों का इस्तेमाल कर आज़ादी की सालगिरह मनाते हैं। घरों और दुकानों को भी तिरंगे से सजाया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में इस दिन खास प्रतियोगिताएं रखी जाती हैं।

 हर वर्ष १५ अगस्त को मनाया जाता है। सन् 1947 में इसी दिन भारत के निवासियों ने ब्रिटिश शासन से स्‍वतंत्रता प्राप्त की थी। यह भारत का राष्ट्रीय त्यौहार है। प्रतिवर्ष इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से देश की जनता को सम्बोधित करते हैं। 

सबसे पहले कौन फहराया तिरंगा

१५ अगस्त १९४७ के दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने, दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर, भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। महात्मा गाँधी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लोगों ने काफी हद तक अहिंसक प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में हिस्सा लिया। स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश भारत को धार्मिक आधार पर विभाजित किया गया, जिसमें भारत और पाकिस्तान का उदय हुआ। विभाजन के बाद दोनों देशों में हिंसक दंगे भड़क गए और सांप्रदायिक हिंसा की अनेक घटनाएं हुईं। विभाजन के कारण मनुष्य जाति के इतिहास में इतनी ज्यादा संख्या में लोगों का विस्थापन कभी नहीं हुआ। क्योकि उस समय पूरे भारत की यह संख्या तकरीबन 1.45 करोड़ थी। भारत की जनगणना 1951 के अनुसार विभाजन के बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए। इस दिन को झंडा फहराने के समारोह, परेड और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। भारतीय इस दिन अपनी पोशाक, सामान, घरों और वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित कर इस उत्सव को मनाते हैं और परिवार व दोस्तों के साथ देशभक्ति फिल्में देखते हैं, देशभक्ति के गीत सुनते हैं।



भारत का इतिहास 

यूरोपीय व्यापारियों ने 17वीं सदी से ही भारतीय उपमहाद्वीप में पैर जमाना आरम्भ कर दिया था। अपनी सैन्य शक्ति में बढ़ोतरी करते हुए ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने 18वीं सदी के अन्त तक स्थानीय राज्यों को अपने वशीभूत करके अपने आप को स्थापित कर लिया था। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत सरकार अधिनियम 1858 के अनुसार भारत पर सीधा आधिपत्य ब्रितानी ताज (ब्रिटिश क्राउन) अर्थात ब्रिटेन की राजशाही का हो गया। दशकों बाद नागरिक समाज ने धीरे-धीरे अपना विकास किया और इसके परिणामस्वरूप 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई० एन० सी०) निर्माण हुआ।123 प्रथम विश्वयुद्ध के बाद का समय ब्रितानी सुधारों के काल के रूप में जाना जाता है जिसमें मोंटेगू-चेम्सफोर्ड सुधार गिना जाता है लेकिन इसे भी रोलेट एक्ट की तरह दबाने वाले अधिनियम के रूप में देखा जाता है जिसके कारण स्वरुप भारतीय समाज सुधारकों द्वारा स्वशासन का आवाहन किया गया। इसके परिणामस्वरूप महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों तथा राष्ट्रव्यापी अहिंसक आंदोलनों की शुरूआत हो गयी। 1930 के दशक के दौरान ब्रिटानी कानूनों में धीरे-धीरे सुधार जारी रहे; परिणामी चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की।195–197 अगला दशक काफी राजनीतिक उथल पुथल वाला रहा। द्वितीय विश्व युद्ध में भारत की सहभागिता, कांग्रेस द्वारा असहयोग का अन्तिम फैसला और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग द्वारा मुस्लिम राष्ट्रवाद का उदय हुआ। 1947 में स्वतंत्रता के समय तक राजनीतिक तनाव बढ़ता गया। इस उपमहाद्वीप के आनन्दोत्सव का अंत भारत और पाकिस्तान के विभाजन के रूप में हुआ। 

स्वतंत्रता से पहले स्वतंत्रता दिवस

1929 लाहौर सत्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज घोषणा की और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में घोषित किया। कांग्रेस ने भारत के लोगों से सविनय अवज्ञा करने के लिए स्वयं प्रतिज्ञा करने व पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्ति तक समय-समय पर जारी किए गए कांग्रेस के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा। इस तरह के स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन भारतीय नागरिकों के बीच राष्ट्रवादी ईधन झोंकने के लिये किया गया व स्वतंत्रता देने पर विचार करने के लिए ब्रिटिश सरकार को मजबूर करने के लिए भी किया गया। कांग्रेस ने 1930 और 1950 के बीच 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया। इसमें लोग मिलकर स्वतंत्रता की शपथ लेते थे। जवाहरलाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा में इनका वर्णन किया है कि ऐसी बैठकें किसी भी भाषण या उपदेश के बिना, शांतिपूर्ण व गंभीर होती थीं। महात्मा गांधी जी ने कहा कि बैठकों के अलावा, इस दिन को, कुछ रचनात्मक काम करने में खर्च किया जाये जैसे कताई कातना या हिंदुओं और मुसलमानों का पुनर्मिलन या निषेध काम, या अछूतों की सेवा। 1947 में वास्तविक आजादी के बाद ,भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया इसके के बाद से 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उस समय की तात्कालिक पृष्ठभूमि

सन् 1946 में, ब्रिटेन की लेबर पार्टी की सरकार का राजकोष, हाल ही में समाप्त हुए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद खस्ताहाल था। तब उन्हें एहसास हुआ कि न तो उनके पास घर पर जनादेश था और न ही अंतर्राष्ट्रीय समर्थन। इस कारण वे तेजी से बेचैन होते भारत को नियंत्रित करने के लिए देसी बलों की विश्वसनीयता भी खोते जा रहे थे। फ़रवरी 1947 में प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने ये घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 से ब्रिटिश भारत को पूर्ण आत्म-प्रशासन का अधिकार प्रदान करेगी। अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने सत्ता हस्तांतरण की तारीख को आगे बढ़ा दिया क्योंकि उन्हें लगा कि, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लगातार विवाद के कारण अंतरिम सरकार का पतन हो सकता है। उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की तारीख के रूप में, द्वितीय विश्व युद्ध, में जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी सालगिरह 15 अगस्त को चुना। ब्रिटिश सरकार ने ब्रिटिश भारत को दो राज्यों में विभाजित करने के विचार को 3 जून 1947 को स्वीकार कर लिया  व ये भी घोषित किया कि उत्तराधिकारी सरकारों को स्वतंत्र प्रभुत्व दिया जाएगा और ब्रिटिश राष्ट्रमंडल से अलग होने का पूर्ण अधिकार होगा। यूनाइटेड किंगडम की संसद के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (10 और 11 जियो 6 सी. 30) के अनुसार 15 अगस्त 1947 से प्रभावी (अब बांग्लादेश सहित) ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान नामक दो नए स्वतंत्र उपनिवेशों में विभाजित किया और नए देशों के संबंधित घटक असेंबलियों को पूरा संवैधानिक अधिकार दे दिया। 18 जुलाई 1947 को इस अधिनियम को शाही स्वीकृति प्रदान की गयी।

 

15 अगस्त 1947 के दिन का प्रोग्राम   सपथ समारोह की समय सारिणी

 सुबह 08.30 बजे – गवर्नमेंट हाउस पर गवर्नर जनरल और मंत्रियों का शपथ समारोह

सुबह 09.40 बजे – संवैधानिक सभा की और मंत्रियों का प्रस्थान

सुबह 09.50 बजे – संवैधानिक सभा तक स्टेट ड्राइव

सुबह 09.55 बजे – गवर्नर जनरल को शाही सलाम

सुबह 10.30 बजे – संवैधानिक सभा में राष्ट्रीय ध्वज को फहराना

सुबह 10.35 बजे – गवर्नमेंट हाउस तक स्टेट ड्राइव

सायं 06.00 बजे – इंडिया गेट पर झंडा समारोह

सायं 07.00 बजे – प्रकाश

सायं 07.45 बजे – आतिश बाज़ी प्रदर्शन

सायं 08.45 बजे – गवर्नमेंट हाउस पर आधिकारिक रात्रि भोज (डिनर)

रात्रि 10.15 बजे – गवर्नमेंट हाउस पर स्वागत समारोह

 

लाखों मुस्लिम, सिख और हिन्दू शरणार्थियों ने स्वतंत्रता के बाद तैयार नयी सीमाओं को पैदल पार कर सफर तय किया। पंजाब जहाँ सीमाओं ने सिख क्षेत्रों को दो हिस्सों में विभाजित किया, वहां बड़े पैमाने पर रक्तपात हुआ, बंगाल व बिहार में भी हिंसा भड़क गयी पर महात्मा गांधी की उपस्थिति ने सांप्रदायिक हिंसा को कम किया। नई सीमाओं के दोनों ओर 2 लाख 50 हज़ार से 10 लाख लोग हिंसा में मारे गए। पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, वहीं गांधी जी नरसंहार को रोकने की कोशिश में कलकत्ता में रुक गए, पर 14 अगस्त 1947, को पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस घोषित हुआ और पाकिस्तान नामक नया देश अस्तित्व में आया; मुहम्मद अली जिन्ना ने कराची में पहले गवर्नर जनरल के रूप में शपथ ली।

संबिधान सभा की बैठक

भारत की संविधान सभा ने नई दिल्ली में संविधान हॉल में 14 अगस्त को 11 बजे अपने पांचवें सत्र की बैठक की। सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने की। इस सत्र में जवाहर लाल नेहरू ने भारत की आजादी की घोषणा करते हुए ट्रिस्ट विद डेस्टिनी नामक भाषण दिया। सभा के सदस्यों ने औपचारिक रूप से देश की सेवा करने की शपथ ली। महिलाओं के एक समूह ने भारत की महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया व औपचारिक रूप से विधानसभा को राष्ट्रीय ध्वज भेंट किया। आधिकारिक समारोह नई दिल्ली में हुए जिसके बाद भारत एक स्वतंत्र देश बन गया। नेहरू ने प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में पद ग्रहण किया, और वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने पहले गवर्नर जनरल के रूप में अपना पदभार संभाला। महात्मा गांधी के नाम के साथ लोगों ने इस अवसर को मनाया। गांधी ने हालांकि खुद आधिकारिक घटनाओं में कोई हिस्सा नहीं लिया। इसके बजाय, उन्होंने हिंदू और मुसलमानों के बीच शांति को प्रोत्साहित करने के लिए कलकत्ता में एक भीड़ से बात की, उस दौरान ये 24 घंटे उपवास पर रहे। 15 अगस्‍त 1947 को सुबह 11:00 बजे संघटक सभा ने भारत की स्‍वतंत्रता का समारोह आरंभ किया, जिसमें अधिकारों का हस्‍तांतरण किया गया। जैसे ही मध्‍यरात्रि की घड़ी आई भारत ने अपनी स्‍वतंत्रता हासिल की और एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र बन गया।


स्‍वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस दिन ट्रिस्ट विद डेस्टिनी (नियति से वादा) नामक अपना प्रसिद्ध भाषण दिया।


कई सालों पहले, हमने नियति से एक वादा किया था, और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभायें, पूरी तरह न सही पर बहुत हद तक तो निभायें। आधी रात के समय, जब दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग जाएगा। ऐसा क्षण आता है, मगर इतिहास में विरले ही आता है, जब हम पुराने से बाहर निकल नए युग में कदम रखते हैं, जब एक युग समाप्त हो जाता है, जब एक देश की लम्बे समय से दबी हुई आत्मा मुक्त होती है। यह संयोग ही है कि इस पवित्र अवसर पर हम भारत और उसके लोगों की सेवा करने के लिए तथा सबसे बढ़कर मानवता की सेवा करने के लिए समर्पित होने की प्रतिज्ञा कर रहे हैं।... आज हम दुर्भाग्य के एक युग को समाप्त कर रहे हैं और भारत पुनः स्वयं को खोज पा रहा है। आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, वो केवल एक क़दम है, नए अवसरों के खुलने का। इससे भी बड़ी विजय और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं। भारत की सेवा का अर्थ है लाखों-करोड़ों पीड़ितों की सेवा करना। इसका अर्थ है निर्धनता, अज्ञानता, और अवसर की असमानता मिटाना। हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही इच्छा है कि हर आँख से आंसू मिटे। संभवतः ये हमारे लिए संभव न हो पर जब तक लोगों कि आंखों में आंसू हैं, तब तक हमारा कार्य समाप्त नहीं होगा। आज एक बार फिर वर्षों के संघर्ष के बाद, भारत जागृत और स्वतंत्र है। भविष्य हमें बुला रहा है। हमें कहाँ जाना चाहिए और हमें क्या करना चाहिए, जिससे हम आम आदमी, किसानों और श्रमिकों के लिए स्वतंत्रता और अवसर ला सकें, हम निर्धनता मिटा, एक समृद्ध, लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील देश बना सकें। ऐसी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं को बना सकें जो प्रत्येक स्त्री-पुरुष के लिए जीवन की परिपूर्णता और न्याय सुनिश्चित कर सके? कोई भी देश तब तक महान नहीं बन सकता जब तक उसके लोगों की सोच या कर्म संकीर्ण हैं

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